बोलो, कहाँ तक टिक सकोगे.. यदि राम सा संघर्ष हो..

है याद वो घटना तुम्हे ?
जब राम थे वनवास में..
सिया थी हर ली गई
था कौन उनके साथ में..
कुटी जब सूनी पड़ी थी
दो भाई और विपदा बड़ी थी..
बोलो ऐसे मोड़ पर,
तुम धैर्य कब तक रख सकोगे…?
बोलो कहाँ तक टिक सकोगे ?
यदि राम सा संघर्ष हो..!!
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वह तो स्वयं भगवान था
पर कहाँ उसमे मान था ..
किरदार भी ऐसा चुना,
जिसमें सिर्फ़ बलिदान था..
मर्यादा के प्राण थे
रघुवंश के अभिमान थे ..
श्री राम के अध्याय से
एक पृष्ठ हासिल कर सकोगे..?
बोलो कहाँ तक टिक सकोगे ?
यदि राम सा संघर्ष हो…
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व्यथा इतनी ही नही है
कथा इतनी ही नही है..
कुछ शब्द उनको पूर्ण कर दे
राम वो गाथा नही है…
जब तपे संघर्ष में,
तब हुए उत्कर्ष में..
क्या तुम भी ऐसी प्रेरणा
पीढ़ियों के बन सकोगे..?
बोलो कहाँ तक तुम टिक सकोगे ?
यदि राम सा संघर्ष हो….

-Kavi Sandeep Dwivedi

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